मिलिए ब्रजेश दुबे से, जिन्होंने गांव में रोजगार सृजन का लिया संकल्प और गांव में लगा दी फैक्ट्री

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इंडिया व्यू ब्यूरो।

नई दिल्ली। गिरमिटिया पीड़ा को झेल चुके ब्रजेश दुबे गांव में ही शिक्षा लेने के बाद रोजी रोजगार की तलाश में गुजरात की ओर रूख किए। झटके खाए, लेकिन कुछ कर गुजरने की आग को बुझने नहीं दिया। अपनी तरह किसी और को यह दिन देखना न पड़े इसका संकल्प लिया। गांव वापस पहुंच गए। गांव स्तर पर ही खुद को रोटी मिले और दूसरे घरों में भी चूल्हा जल सके। बिहार के सीवान जिले के राजपुर गांव में ऑटोमेटिक बिस्किट फैक्ट्री की शुरूआत कर दी।

ईमानदारी औ समर्पण भाव से शुरू किया गया यह कार्य फलने फुलने लगा। नतीजा सामने है सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला। गांव की आर्थिक तस्वीर बदले जाने के बाद आज हर सुविधा इनके आसपास के गांवों में उपलब्ध है। सुखद बात यह है कि ब्रजेश दुबे अपने लाभांश को गांव के विकास में लगाते हैं।

गांव की आर्थिक तस्वीर बदले जाने के बाद आज हर सुविधा इनके आसपास के गांवों में उपलब्ध है। सुखद बात यह है कि ब्रजेश दुबे अपने लाभांश को गांव के विकास में लगाते हैं।

आयोजन मंडल के सदस्यों का कहना है कि बदलाव की दिशा में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए आपको विगत 31 मार्च को बदलाव के सारथी’ सम्मान से सम्मानित किया गया। आपको सम्मानित करते हम सभी को बेहद खुशी हुई है। आपसे बहुत प्रेरणा एवं ऊर्जा मिली है। हम सभी आपके लिए कामना करते हैं कि आप ऐसे ही रोजगार का सृजन कर समाज को सशक्त करते रहें।

दरअसल, 31 मार्च, 2019 को नई दिल्ली के कॉस्टीट्यूशन क्लब में सार्थक बातचीत के लिए एक आयोजन किया गया। विषय था ‘बदलाव के सारथी’। आयोजन का मकसद था कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए कुछ अलग कर रहे लोगों के साथ बातचीत हो सके। एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ने के लिए एक दूसरे का हाथ थामा जा सके। एक दूसरे को प्रेरणा मिल सके।

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