एक ‘कल्पना’ जिसने एक ‘कल्पना’ को हकीकत में बदला

kalpna

-दिनेश चंद्र पांडेय*

कोई अपनी मातृभूमि के लिए काम करे, कोई अपनी मातृभाषा के लिए काम करे या फिर कोई अपनी अपनी सभ्यता या संस्कृति के लिए काम करे। लेकिन, इन सभी से इत्तर यदि कोई दूसरे संस्कृति, भाषा, और भूमि के लिए काम करे। यह बड़ी बात हो सकती है। यह कल्पना की चीज नहीं बल्कि इसे हकीकत में कल्पना ने सिद्ध करके दिखाया दिया है। वैसे तो कहा जाता है। किसी सपने को मूर्त रुप में देखने की पहली प्रक्रिया ‘कल्पना’ ही है। मगर कोई कोई ही ‘कल्पना’ को हकीकत में बदलता है। इसी कल्पना को कल्पना पटवारी ने बदलकर दुनिया को दिखा दिया है।

भोजपुरी की हस्ताक्षर कल्पना का पूरा नाम कल्पना पटवारी है। कल्पना मूल रुप से असम की रहने वाली हैं। लेकिन, इन्होंने अपना पूरा जीवन भोजपुरी भाषा, भूमि और संस्कृति के लिए होम कर रखा है। यह छोटी बात नहीं है कि दूसरे भाषा, भूमि और संस्कार में पली बढ़ी कल्पना आज भोजपुरी उच्च स्तर के गायकी की पहचान बन चुकी हैं।

वैसे तो मैं कल्पना पटवारी को पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से सुनते और देखते आ रहा हूं। मगर पिछले दिनों मुंबई प्रवास के दौरान उनके आवास पर एक मुलाकात ने मेरी उनकी प्रति मेरी धारणा को और बढ़ा दिया। विनम्रता के साथ स्वागत मानों भोजपुरी भूमि के इसकी आंगन में कोई स्वागत कर रहा हो।

 “भोजपुरी भाषा और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसे स्थापित कर एक ब्रांड बनाया जाए। इसकी तड़प मैंने अपनी आखों से महसूस किया। जब कल्पना ने भोजपुरी के महान व्यक्तित्व भिखारी ठाकुर की विचारधारा और उनकी तमाम कलाओं को वे दुनिया के कई बड़े हस्तियों से की तो मैं अपने आप को रोक नहीं सका”

बातचीत के दौरा में भोजपुरी की उनकी संवेदना अब तक किसी दूसरे गायक या गायिका में मैंने नहीं देखा। भोजपुरी भाषा और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसे स्थापित कर एक ब्रांड बनाया जाए। इसकी तड़प मैंने अपनी आखों से महसूस किया। जब कल्पना ने भोजपुरी के महान व्यक्तित्व भिखारी ठाकुर की विचारधारा और उनकी तमाम कलाओं को वे दुनिया के कई बड़े हस्तियों से की तो मैं अपने आप को रोक नहीं सका। घंटों भिखारी ठाकुर को लेकर चर्चाएं होते रहीं। जिन भिखारी ठाकुर का गांव आज उपेक्षा का शिकार है। ऐसे महान हस्ती के प्रति कल्पना पटवारी की बहुत बड़ी योजना है। जिसको वे धीरे-धीरे हकीकत का अमलीजमा पहना रही हैं। सच में भिखारी ठाकुर भोजपुरी की आन, बान और शान हैं।

पिछले दिनों भोजपुरी की मशहूर गायिका और लेखक दिनेश चंद्र पांडेय से हुई थी मुलाकात

पिछले दिनों भोजपुरी की मशहूर गायिका और लेखक दिनेश चंद्र पांडेय से हुई थी मुलाकात

बातों-बातों कल्पना ने भूपने दा की भी चर्चा कीं। भूपने दा के काम और भिखारी ठाकुर के काम के बातों को साझा करते हुए वे खो जाती हैं। वे कहती हैं ये दोनों महान विभूति मेरे गुरु से कम नहीं हैं। भिखारी ठाकुर के कार्यों, उनकी रचनाओं में पूरी भोजपुरी संस्कृति की झलक और कई अनकही बातें छूपी हुई हैं।

वास्तव में कल्पना से मिलना, उनसे बातें करना और भोजपुरी के प्रति उनकी संवेदना मेरे लिए एक धरोहर के रुप में हैं। मुझे आशा है कि कल्पना के सारे सपने पूरे हों और भोजपुरी, भूमि, भाषा और संस्कृति की मिठास दूर तक पहुंचे।

*(लेखक, लोकसभा सांसद के निजी सचिव हैं। यह लेखक का निजी विचार है।)

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