किशोर कांत…मकसद है खाने की बर्बादी को रोकना और भूखे को भोजन कराना

kishor kant tiwari

इंडिया व्यू ब्यूरो। 

मिलिए बदलाव के सारथी किशोर कांत से…जिनका एक ही मकसद है खाने की बर्बादी को रोकना और भूखे को भोजन कराना। भूख जीवन की सबसे बड़ी हकीकत है और यह लाचारी में हर काम करने के लिए मजबूर करती है। आज से महज तीन साल पहले किशोर कांत ने कुडे के ढेर से रोटी तलाशते हुए किसी को देखा, अंदर से हिल गए और यही घटना आपको नए काम के लिए विवश कर दिया। आज लोग इन्हें काशी में रोटी बैंक के जन्मदाता के रूप में जानते हैं। किशोर कांत जी मूलतः वाराणसी के रहने वाले हैं।

देश में हो रहे खाने की बर्बादी को रोकना और भूखे को भोजन कराना किशोर कांत का एक मात्र मकसद है। इस काम को अंजाम देने के लिए देश के नौ राज्यों के 40 शहरों में रोटी बैंक अपने मकसद में जुटा है।

बदलाव की दिशा में उत्कृष्ट योगदान देने के 31 मार्च, 2019 को बदलाव के सारथी’ सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। श्री तिवारी के कार्यों से आसपास के युवाओं को बहुत प्रेरणा एवं ऊर्जा मिली है। इंडिया व्यू आपके लिए कामना करते हैं कि आप ऐसे ही रोजगार का सृजन कर समाज को सशक्त करते रहें।

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