आज भी लोगों के दिलों में धड़कते हैं डॉ. रामएकबाल बाबु

dr. ramekbal sinha

-जय प्रकाश*

इस दुनिया कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो भले ही इस दुनिया में न हों, लेकिन लोगों के दिलों में रचते हैं। लोगों के दिलों में जगह बनाते हैं। बसते हैं। और हमेशा के लिए धड़कते हैं। कुछ इसी तरह के मनीषी थे कैप्टन डॉ. रामएकबाल सिन्हा। गोपालगंज जिले के मशहूर चिकित्सक। आज भी करीब 25 लाख की आबादी वाले जिले का कोई ऐसा परिवार नहीं है। जिसका कोई न कोई सदस्य कैप्टन डॉक्टर रामएकबाल सिन्हा से अपना इलाज न कराया हो।

कैप्टन डॉ. रामएकबाल सिन्हा को लोग प्यार से रामएकबाल बाबु कहते थे। गोपालगंज जिला मुख्यालय में स्थित अस्पताल मोड़ पर डॉ. साहब अपने आवास में मरीजों को देखते थे। चिकित्सक भगवान के रुप होते हैं। इसकी झलक डॉ. साहब में देखने को मिलती थी। लोग बताते हैं कि जिले के सुदूर इलाकों से लोग बैलगाड़ी, ट्रैक्टर, जीप और बसों से आते थे। सैकड़ों की संख्या में मरीज आते थे। बिना किसी परेशानी सभी लोगों को शाम और देर रात तक देखते थे।

ऐसे हजारों लोग मिलेंगे जो एक झटके में डॉ. रामएकबाल बाबु से जुड़ी तमाम बातों को याद कर सिहर उठते हैं। जिले से लेकर देश-दुनिया का कोई ऐसा कोना नहीं है। जहां डॉ. साहब के प्रशंसक नहीं हैं। डॉ. रामएकबाल बाबु की परंपरा और उनके आदर्शों एवं मूल्यों को पुत्र डॉ. शशिशेखर सिन्हा न सिर्फ आगे बढ़ा रहे हैं। बल्कि एक कदम आगे बढ़कर लोगों को जीवन प्रदान करने के साथ-साथ तमाम सामाजिक कार्यों को गति दे रहे हैं।

जहां तक मुझे याद है जब मेरी इया (दादी) बीमार होती थीं तो उनका भरोसा सिर्फ डॉ. रामएकबाल बाबु पर ही होता था। वह कहतीं थी मैं रामएकबाल बाबु से दिखाउंगी तो ठीक हो जाउंगी। खैर इया नहीं रहीं। लेकिन, जब मैं यह आलेख लिख रहा था तो वर्तमान पीढ़ी की मेरी पत्नी जयश्री को जैसे ही पता चला की डॉ. साहब पर कुछ लिख रहा हूं। तपाक से उन्होंने डॉ. साहब से जुड़ी ढेरों स्मरण को सुना दिया। वे कहती हैं “वे तो मेरे जीवन दाता हैं। मुझे तो उन्होंने ने ही बचाया है। अगर वे नहीं होते तो आज मैं  नहीं होती।”

इस तरह के संस्मरण तो एक बानगी है। ऐसे हजारों लोग मिलेंगे जो एक झटके में डॉ. रामएकबाल बाबु से जुड़ी तमाम बातों को याद कर सिहर उठते हैं। जिले से लेकर देश-दुनिया का कोई ऐसा कोना नहीं है। जहां डॉ. साहब के प्रशंसक नहीं हैं।

डॉ. रामएकबाल बाबु सेना में कैप्टन के पद पर भी रहे। उनकी पूरी पढ़ाई  उच्च स्तर की हुई। उस दौर की एक तस्वीर दिल्ली के विज्ञान भवन की मिली। आज भी विज्ञान भवन के किसी कार्यक्रम में जाने का मौका सामान्य आदमी को नहीं नहीं मिल पाता है। इन तमाम भौतिक सुख और आधुनिक चमक छोड़ उन्होंने अपनी मातृ भूमि में रहकर गरीब, दीन-हीन की सेवा करने का संकल्प लिया। और गोपालगंज की धरती को चुना।

dr. shashishekhar ji

एक कार्यक्रम के दौरान कैप्टन डॉ. रामएकबाल सिन्हा (बीच में) एवं सबसे दाएंं पुत्र एवं प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ शशिशेखर सिन्हा। फोटो-फाइल

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सामाजिक चिंतक ब्रजनंदन जायसवाल ने अपने संस्मरण को याद करते हुए कहते हैं “कोई चाहें कितनी भी बीमारी से क्यों न पीड़ित हो, लेकिन डॉ. साहेब के सामने पड़ने पर आधा कष्ट दूर हो जाता था। कहीं न कहीं उन्हें ईश्वरीय शक्ति प्राप्त थी। सहज स्वभाव, मरीजों के कष्टों से उबारने में रामबाण की तरह काम करता था। इतना ही नही अगर कोई मरीज पहले किसी डॉक्टर से इलाज करा रहा हो और दवा एवं डायग्नॉसिस भी गलत हो गया हो तब भी आलोचना किए बिना वह सहज तरीके से कहते इहो सब दवइया त ठीके रहला, काहें न काम कइला सा अब ओ सब के बंद कर दीं अउर हई नया दवा खाईं युधिष्टिर की तरह दुर्योधन को भी सुर्योधन कहना। आलोचना किसी की भी नहीं करना। सबको सम्मान, सम्मान और प्यार प्यार करना।”

डॉ. रामएकबाल बाबु की परंपरा और उनके आदर्शों एवं मूल्यों को पुत्र डॉ. शशिशेखर सिन्हा न सिर्फ आगे बढ़ा रहे हैं। बल्कि एक कदम आगे बढ़कर लोगों को जीवन प्रदान करने के साथ-साथ तमाम सामाजिक कार्यों को गति दे रहे हैं। मुझे तो यह सौभाग्य नहीं मिला डॉ. रामएकबाल बाबु से मिलने का, लेकिन जब भी डॉ. शशिशेखर सिन्हा जी से मिलता हूं तो डॉ. रामएकबाल बाबु की सुनी हुई तमाम बातों की झलक इनमें भी पाता हूं। एक अभिभावक, एक पिता, एक शिक्षक और चिकित्सक की तरह कुछ न कुछ सीखने को मिलता है।

(*लेखक इंडिया व्यू के संपादक हैं। इससे पहले हिंदुस्तान, नई दिल्ली, राष्ट्रीय सहारा, स्वदेश, द संडे इंडियन और महुआ टीवी में सेवाएं दे चुके हैं। )

One Response to आज भी लोगों के दिलों में धड़कते हैं डॉ. रामएकबाल बाबु

  1. Satyendra Nath Gupta says:

    Aaj bhi mujhe yad hai ek wakya.mere babuji jo bahut binar the aur ham logo ki situation bhi bahut khrab tha. Ham log us samay k new practice krne wale aur Dr Sambhu Nath ji se pahle mile to wo transfer likh diye the but ham logo ki situation waisa nhi tha ki kahi bahar jake treatment kra ske. Fir kisi ne salah diya ki Dr. Ramekbal babu se check kraya jay, aur fir ham log gye. Bahut hi bariki se chek up kiya aur utna hi santawna diye ki chinta na krein aap log ye jld hi thik ho jayenge aur mere babuji me ko 2-3 din me hi achha sudharna hone lga. Tabse mere babuji ko kabhi bhi kuchh hua to DrRamekbal babu hi hilaj kiye. Mai aur mera poora pariwar unka aabhari rahega.

    Aapka yani is Jai prakash ji ka mitra,
    Satyendra
    Piprahi, Thawe Gopalganj

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