स्वराज इंडिया ने बड़े प्रोजेक्टर से इंडिया गेट की दीवार पर दर्शाया किसानों का दर्द

india gate

-इंडिया व्यू ब्यूरो।

ऩई दिल्ली। किसान मुक्ति संसद को लेकर प्रचार अभियान को तेज करते हुए जय किसान आंदोलन (स्वराज इंडिया) के कार्यकर्ताओं ने ऐतिहासिक इंडिया गेट की दीवार पर वीडियो चलाकर किसानों का दर्द बयां किया। एक बड़े प्रोजेक्टर के माध्यम से सैकड़ों पर्यटकों-दर्शकों की मौजूदगी में किसानों की बदहाली दिखाया गया। इंडिया गेट की दीवार पर चलाये गए इस वीडियो की ख़बर ने सत्ता गलियारों में हड़कंप मच दी है। आज जब सरकार खेती किसानी जैसे देशव्यापी संकट के प्रति बेसुध और बेख़बर पड़ी है, स्वराज इंडिया का यह प्रचार अभियान सरकार का इस ओर ध्यान दिलाने की कोशिश है।

वीडियो के साथ-साथ “जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी” गाना बजाकर किसानों की शहादत की दास्तां इंडिया गेट की दीवार पर  दर्ज़ की गई। घाटे कर्ज़े में रहने के बावजूद किसान फसल उपजाकर 125 करोड़ का पेट भरता रहा है। और जब कर्ज़े के जाल से मुक्त होता न देख आत्महत्या की राह अपनाता है, वह शहीद का दर्जा प्राप्त करता है। इन आत्महत्याओं के लिए सरकार जिम्मेवार है।

वहीं एक दूसरे प्रचार में स्वराज इंडिया ने मीडिया को ग्राम आर्ट द्वारा निर्मित बीज-पत्र देकर किसान मुक्ति संसद के लिए आमंत्रित किया है। नोएडा फ़िल्म सिटी समेत दिल्ली स्थित तमाम मीडिया प्रतिष्ठानों में किसानों ने स्वयं जाकर मीडियाकर्मी को निमंत्रण दिया और संसद में आने का आग्रह किया।

सरकारी आंकड़ें बताते हैं कि सिर्फ 1995 के बाद 3.3 लाख किसानों ने आत्महत्या किया है। जो किसान ने बड़ी मेहनत और ईमानदारी से अनाज उपजाकर देश का पेट भरता आया है, सरकार उन्हें सम्मानजनक आय का जीवन देने में नाकाम रहा है। गलत नीतियों का परिणाम हुआ कि आज की खेती से किसान अपने परिवार के लिए न्यूनतम साधन भी नहीं जुटा सकता। उसके उपजाए अनाज को कम दाम देकर लूटा गया है। वास्तव में आज किसान देश को सब्सिडी दे रहे हैं, कारण की किसान को उसके उपज का उचित/पूरा दाम नहीं मिल रहा है। खेती किसानी का खर्चा बढ़ने के बावजूद भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। 2017-18 के 14 खरीफ़ फसलों में से 8 का एमएसपी अनाज उत्पादन के लागत से भी कम रखा गया। सरकार द्वारा किसानों को लाभकारी मूल्य नही देने की वजह से उन्हें प्रति वर्ष 2 लाख करोड़ का घाटा होता है।

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