नए प्रयोग के ‘जादूगर’ हैं बिहार के आईएएस राहुल कुमार

rahul kumar ias

गांव के लोगों से तालमेल बैठाने, उनके लिए विकास की नई इबारत लिखने, खुले में शौच मुक्त गांव बनाने, सामाजिक कुरीतियों को तोड़ने, गांव के लोगों के साथ रात बिताने, उनके साथ खाने पर विकास की बात करने आदि पहल कर दुनिया में नाम बटोरी है युवा आईएएस राहुल कुमार ने।

कुछ इसी सोच को लेकर एक सधारण कद-काठी और सहज जीवन जीने वाले युवा पिछले कई वर्षों से गोपालंगज जिलाधिकारी के रुप में बेहतर व्यवस्था के लिए कई तरह के प्रयोग कर रहे हैं। इनकी स्टोरी को स्थानीय मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक में जगह मिली है। राहुल कुमार से जुड़ी पांच बातें। इंडिया व्यू के लिए गोपालगंज से ओम प्रकाश मिश्र की रिपोर्ट।

जब राहुल कुमार ने खुद मिड डे मील खाकर विवाद खत्म किया

उस समय गोपालगंज के जिलाधिकारी राहुल कुमार इंटरनेशनल मीडिया की सुर्खियों में शामिल हो गए। जब एक गांव में दबंगों ने सुनीता देवी के हाथ से बने मिड डे मील को खाने पर पाबंदी लगा दी थी। उनका कहना था कि विधवा के हाथ का खाना सही नहीं होता है। इसकी सूचना जैसे ही राहुल कुमार को मिली। उन्होंने अपनी तत्परता दिखाते हुए खुद उस गांव गए और बच्चों के साथ खाना खाया। इस पहल के बाद सारे विरोध खत्म हो गए। यह खबर आग की तरह फैली। जिसे देश-विदेश के मीडिया ने कवर भी किया।

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खाना खाकर विवाद खत्म करते हुए

राहुल की “रात्रि चौपाल” में गांव की बात

जब डीएम राहुल कुमार के विषय में जानने के लिए गुगल पर सर्च किया गया है तो तमाम विदेशी मीडिया में रात्रि चौपाल की खबर दिखी। वैसे तो केंद्र एवं राज्य की योजनाओं को गांव तक पहुंचने के सरकारी स्तर पर तमाम तरह के प्रयास होते हैं। लेकिन, जिलाधिकारी राहुल कुमार ने इससे एक कदम आगे बढ़कर रात्रि चौपाल की पहल की। रात्रि चौपाल का कॉंसेप्ट बिलकुल ही अलग है। इनका मानना है कि दिन में अक्सर लोग काम में या मजदूरी करने चले जाते हैं। उनकी समस्याएं कैसे सुनी जा सकती हैं। इसी लिए शाम में या रात में जब सभी लोग निश्चिंत होकर मिलते हैं। लिट्टी चोखा बनता है और उनके गांव में भी उनके विकास की बात होती है। विकास के साथ शौचालय बनवाने, खुले में शौच से मुक्त गांव बनाने और खासकर महिलाओं की भागीदारी ज्यादा से ज्यादा हो इसे लक्ष्य मानकर चौपाल का आयोजन होता है। वे कहते हैं अब रोटी, कपड़ा और मकान से एक कदम आगे बढ़कर सोचने की जरुरत है।

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राहुल कुमार की रात्रि चौपाल, गांव में। समाज बदलने की पहल

ब्लॉगर भी हैं राहुल कुमार

युवा आईएएस राहुल कुमार ने गोपालगंज में जिलाधिकारी बनने के साथ ही अपने कार्यों से सुर्खियां बटोरी हैं। सामाजिक स्तर पर योगदान देकर तमाम कार्यों को एक झटके में सुलझा लेने वाले राहुल कुमार की पहचान अन्य क्षेत्रों में भी है। बहुत ऐसे कम लोग हैं जो इनके दूसरे पहलुओं से वाकिफ होंगे। ऐसे में इनकी एक पहचान एक ब्लॉगर के रुप में भी है। ये ब्लागिंग के शौकीन है। “आवाज” नामक इनके ब्लॉग पर आप कविताओं का संकलन आदि पढ़ सकते हैं। श्री कुमार 2012 से ब्लॉग लेखन का कार्य कर रहे हैं।

युवा साहित्यकार के रुप में भी हैं राहुल कुमार की पहचान

अतेरों बार रचनाओं के प्रस्फुटन के साथ ही/उनकी भ्रूणहत्या करता रहा हूँ/ अपराधबोध एवं कुंठा का लम्बा खींचता दंश/जब असह्य होने को आया/तो यह तय पाया कि/अब मुश्किल है/स्वयं को और जब्त करना/ स्वयं से और दूर रहना…।

ये कुछ पंतियां गोपालगंज डीएम राहुल कुमार की हैं। जिस तरह एक इंसान की कई क्षेत्रों में पहचान होती है। ठीक उसी तरह राहुल कुमार की पहचान तमाम क्षेत्रों के साथ युवा साहित्यकार के रुप में भी हैं। इन्होंने अनेकों कविताओं की रचना की हैं। इनकी रचनाओं को देश के तमाम नामचीन साहित्यिक पत्रिकाओं में स्थान मिला है। “तद्भव” साहित्यिक पत्रिका में अनेकों रचनाएं प्रकाशित हैं। जानकार बताते हैं इनकी रचनाओँ में कई तरह के बिंब नजर आते हैं। साथ ही तमाम कुरीतियों पर भी वार करती हैं।

सोशल मीडिया पर सक्रियता ही नहीं समाधान भी

गोपालगंज के डीएम राहुल कुमार सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहते हैं। जबकि इन्हें फेसबुक या अन्य सोशल साइट्स पर पसंद करने वाले लोग चंद मिनट में सैकड़ों लाइक्स व कॉमेंट करते हैं। गोपालगंज के ऐसे तमाम लोग हैं जो सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी समस्याओँ को इनके सामने रखते हैं और ये उनका समाधान भी करते हैं। इसके साथ ही गोपालगंज जिले का अपना पेज, एप्प आदि भी इनकी ही पहल का नतीजा है। फोटो- साभार

 (पटना से विनय कुमार)

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