गयाः जहां मोक्ष और ज्ञान का है संगम

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मोक्ष की प्राप्ति हो या ज्ञान की दोनों ही स्थिति में गया से बेहतर दूसरा तीर्थ स्थान हीं है। जिस जगह को भागवान बुद्ध ने चुना और उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। वह भारत ही नहीं दुनिया के कई देश के लोगों के लिए तीर्थ स्थली के रुप में प्रसिद्ध है। पेश है अनुभव की एक रिपोर्ट।

वैसे तो बिहार की जो भी पहचान हो मगर, इसे ज्ञान की साधना स्थली के रुप में प्राचीन काल से जाना जाता है। कलांतर में इसकी जो भी पहचान बनी हो,  लेकिन, ज्ञान की प्राप्त के लिए नालंदा विश्वविद्यालय में दुनिया के लोग आते थे।

इसी तरह महात्मा बुद्ध ने बिहार के गया को ही अपने साधना स्थली के रुप में चुना। गया की भूमि बौध धर्म के लिए तपो भूमि के रूप में जाना जाता है।

बिहार की राजधानी पटना से करीब 110 किलोमीटर दूर स्थित बोधगया है।  गया जिले से सटा एक छोटा शहर है। कहते हैं बोधगया में बोधि पेड़़ के नीचे तपस्या कर रहे गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। तभी से यह स्थल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

गौतम बुद्ध फाल्गु नदी के तट पर पहुंचे और बोधि पेड़ के नीचे तपस्या करने लगे। तपस्या के बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई, जिसके बाद से वे बुद्ध के नाम से जाने गए।

बिहार में गया को मंदिरों के शहर के नाम से जाना जाता है। बुद्ध के ज्ञान की यह भूमि आज बौद्धों के सबसे बड़े तीर्थस्थल के रुप में मशहूर है। आज विश्व के हर धर्म के लोग यहां घूमने आते हैं। पक्षियों की चहचहाट के बीच बुद्धम्-शरनम्-गच्छाहमि की हल्की ध्वनि अनोखी शांति प्रदान करती है। यहां का सबसे प्रसिद्ध मंदिर महाबोधि मंदिर’ है। विभिन्न धर्म के लोग इस मंदिर में शांति की तलाश में आते हैं।

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