कभी सेल्फी के लिए लाइन में लगने वाले केवी यादव ने ध्वस्त किया ‘सिंधिया’ का किला

kp yadav

कामदा कुमार की रिपोर्ट।

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में गुना लोकसभा सीट की चर्चा जोरो पर है। सोशल मीडिया पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराने वाले केपी यादव यानी कृष्ण पाल याद के आत्मसम्मान को लेकर प्रेरक कहानी के रूप में शेयर किया जा रहा है।

सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को हाने वाले केपी यादव कभी सेल्फी लेने के लिए लाइन में लगे रहते थे। केपी यादव ने पिछले 20 वर्षों से कांग्रेस के कार्यकर्ता रहे विभिन्न पदों पर इन्होंने कार्य किया था, अबसे करीब 4 वर्ष पूर्व यह ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास उनके संग सेल्फी खिंचाने की रिक्वेस्ट लेकर गए और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इन्हें मन कर दिया। जिससे इनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस लगी।
दरअसल, केपी यादव को भाजपा का उम्मीदवार बनाए जाने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया ने कहा था कि
एक समय ऐसा था जब कृष्ण पाल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ सेल्फी लेने के लिए लाइन में रहते थे। प्रियदर्शिनी सिंधिया ने एक फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी जिसमें उन्होंने कहा कि जो कभी महाराज के साथ सेल्फी लेने की लाइन में रहते थे, उन्हें भाजपा ने अपना प्रत्याशी चुना है।

कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को हाने वाले केपी यादव कभी सेल्फी लेने के लिए लाइन में लगे रहते थे। केपी यादव ने पिछले 20 वर्षों से कांग्रेस के कार्यकर्ता रहे विभिन्न पदों पर इन्होंने कार्य किया था, अबसे करीब 4 वर्ष पूर्व यह ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास उनके संग सेल्फी खिंचाने की रिक्वेस्ट लेकर गए और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इन्हें मन कर दिया।

45 साल के कृष्ण पाल यादव पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर हैं। उनके पिता अशोकनगर में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे हैं।

यहां बता दें कि गुना में सिंधिया परिवार का कब्जा रहा है। इस सीट से ज्योतिरादित्य की दादी विजयाराजे सिंधिया 6 बार, ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया 4 बार और ज्योतिरादित्य ने 4 बार चुनाव जीता है।

मध्यप्रदेश में सरकार होने के बाद भी कांग्रेस को बुरी तरह शिकस्त का सामना करना पड़ा है। मध्यप्रदेश में भाजपा ने 29 लोकसभा सीटों में से 28 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि कांग्रेस के हिस्से में एक सीट आई है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना से एक लाख से ज्यादा वोटों से हार गए।

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