आईआईटी बीएचयू में सफलता के गुर सिखाए हसुड़ी औवसानपुर के प्रधान दिलीप त्रिपाठी

DILIP JI AT IIT BHU

इंडिया व्यू ब्यूरो।

वाराणसी। देश के अतिपिछड़े जनपद सिद्धार्थनगर के हाईटेक गांव हसुड़ी औवसानपुर के प्रधान दिलीप कुमार त्रिपाठी ने आईआईटी, बीएचयू, वाराणसी में गांव को स्मार्ट बनाने की कहानी कही और छात्रों को सफलता के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि अगर आपके अंदर जोश, जुनून और जज्बा हो तो कुछ भी असंभव नहीं हैं। देश के जब अतिपिछड़े जनपद के अतिपिछड़े गांव को महज चार साल में कायाकल्प किए जा सकते हैं तो आप जैसे पढ़े-लिखे युवा भारत के किसी भी गांव को बदल सकते हैं। इसके लिए आपके अंदर कठोर परिश्रम करने की ताकत और दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए।

दरअसल, आईआईटी, बीएचयू के एमसीआईआईई सेंटर में लीडरशिप समिट का आयोजन किया गया था। जिसमें देश भर से कुछ अलग कर रहे लोगों को बुलाया गया था। ताकि सफल लोगों के संघर्ष की कहानी से छात्रों में ऊर्जा का संचार हो और एक बदलाव की दिशा में काम किया जा सके। श्री त्रिपाठी को सेंटर के प्रमुख प्रो. पीके मिश्रा ने स्मृति चिंन्ह प्रदान किया।

छात्रों को अपने जीवन संर्घष की दास्तां साझा करते हुए श्री त्रिपाठी ने कहा कि मेरी माता जी के साथ एक दुखद घटना हुई और मां चल बसीं। लेकिन, अंतिम समय में उन्होंने हमें बचन दिया कि बेटा इस गांव के लिए तुम जरुर कुछ करना। घर की आर्थिक तंगी ने नौकरी की तलाश में अन्य प्रदेशों की तरफ जाने के लिए मजबूर कर दिया। मगर मां की बातें हमेशा मन को ‘कचोटते’ रहती थीं। फिर लौटकर गांव के लिए सोंचने लगा और अपने जीवन को गांव के नाम कर दिया। गांव के लोगों का मेरे ऊपर भरोसा हुआ और मैं प्रधान बना।

उन्होंने कहा कि गांव में सबसे पहले हमने स्कूल को बेहतर करने का प्रयास किया। सारी सुविधाओं से स्कूल को जोड़ा। आज स्कूल में सारी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध है। निजी स्कूलों से बच्चों को दाखिला अब मेरे गांव के सरकारी स्कूल में होने लगा।

श्री त्रिपाठी मां को याद करते हुए कई बार भावुक भी हो गए। सारे सभागार में लोगों के आंसू छलक गए। उन्होंने कहा कि जिस में का इलाज के अभाव में अंत हो गया। आज उऩ्हीं की स्मृति में आधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल की बुनियाद रखी गई है। गांव में सुरक्षा के हिसाब से सीसीटीवी कैमरे लगें हैं। पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाए गए हैं। सड़कें पक्की हो गई हैं। गांव को महिलाओं के नाम समर्पित करते हुए पिंक कलर से रंग रोगन किया गया है गांव की जीआईएस मैपिंग की गई और अभी बहुत कुछ होना बाकी है।

उन्होंने छात्रों से यह कहा कि आप जहां भी रहिए लेकिन, अपने गांव के लिए सोचिए। जब गांव स्मार्ट होगा तभी जाकर शहर स्मार्ट होंगे और आप लोग भी भारत ही नहीं दुनिया के भविष्य हैं। आप तकनीक के सहारे बहुत कुछ कर सकते हैं। और देश बदल सकता है।

कार्यक्रम का संयोजन एटीई वर्ल्ड टॉक के सीईओ आयुष केशरी ने किया। जबकि संचालन सत्येंद्र यादव और व्यवस्था सनी कुमार केशरी ने किया।

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