नियोजित शिक्षक:समान काम के बदले समान वेतन मामले में बिहार सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, अगली सुनवाई 15 को

supreme court of India

इंडिया व्यू ब्यूरो।

नयी दिल्ली। नियोजित शिक्षकों के समान काम के बदले समान वेतन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फटकार लगाई है। सोमवार को बिहार में निर्धारित मानदेय पर कार्य कर रहे साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों की सुनवाई हुई। कोर्ट ने मुख्य सचिव को एक कमेटी गठित कर पूरी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी।

शीर्ष न्यायालय ने बिहार सरकार को कहा है कि जब आपने नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति की। तब उनकी योग्यता पर आपत्ति क्यों नहीं जतायी? समान कार्य के लिए समान वेतन देने की बात जब सामने आने पर उनकी योग्यता पर प्रश्न उठा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को आदेश दिया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर नियोजित शिक्षकों की योग्यता से संबंधित मामले की जांच कर पूरी रिपोर्ट सौंपें। साथ ही पटना हाईकोर्ट के 31 अक्टूबर, 2017 के फैसले को लागू करने में परेशानी के बारे में विस्तृत रिपोर्ट दें।

मालूम हो कि बिहार सरकार ने समान कार्य के लिए समान वेतन देने के पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करते हुए कहा था कि समान कार्य के लिए समान वेतन देने पर सरकार को अतिरिक्त करीब 15,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। राज्य में संसाधनों की कमी है।

ज्ञात हो कि बिहार के नियोजित शिक्षक संगठनों ने भी सरकार से समान काम के बदले समान वेतन की मांग की। लेकिन, सरकार द्वारा नियोजित शिक्षक संगठनों की मांग नहीं मांगे जाने पर वे पटना हाईकोर्ट चले गये। मामले में पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 31 अक्तूबर, 2017 को नियोजित शिक्षकों के हक में फैसला दे दिया।

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