आप भी पढ़ें…गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का मार्मिक पत्र

Manohar Parrikar

इंडिया व्यू ब्यूरो।

नई दिल्ली। पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं । अमेरिका के अस्पताल के बिस्तर से उनका यह संदेश बहुत मार्मिक है । आप भी अवश्य पढ़ें। यह संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इंडिया व्यू डॉट इन इसके प्रमाणिता का दावा नहीं करता है। सोशल मीडिया पर चल रहे इस संदेश को आप तक पहुंचा रहा है। इंडिया व्यू मनोहर पर्रिकर के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता है। संदेश मूल रुप से मराठी भाषा में है, लेकिन, वायरल संदेश में यह है कि इसका अनुवाद पुखराज सावंतवा द्वारा किया गया है।

“मैंने राजनैतिक क्षेत्र में सफलता के अनेक शिखरों को छुआ।
दूसरों के नजरिए में मेरा जीवन और यश एक दूसरे के पर्याय बन चुके थे।फिर भी मेरे काम के अतिरिक्त अगर किसी आनंद की बात हो तो शायद ही मुझे कभी प्राप्त हुआ।आखिर क्यो?

तो जिस राजनीतिक अवस्था मे जिसमें मैं आदतन रम रहा था । आदी हो गया था ।वही मेरे जीवन की हकीकत बन कर रह गई है । इस समय जब मैं बीमारी के कारण बिस्तर पर सिमटा हुआ हूं, मेरा अतीत मेरे स्मृतिपटल पर तैर रहा है । जिस ख्याति प्रसिद्धि और धन संपत्ति को मैंने सर्वस्व माना और उसी के व्यर्थ अहंकार में पलता रहा ,आज जब खुद को मौत के दरवाजे पर खड़ा देख रहा हूँ तो वो सब धूमिल होता दिखाई दे रहा है । साथ ही उसकी निर्थकता बड़ी शिद्दत से महसूस कर रहा हूं ।

आज जब मृत्यु पल पल मेरे निकट आ रही है, मेरे आस पास चारों तरफ हरे प्रकाश से टिमटिमाते जीवन ज्योति बढ़ाने वाले अनेक मेडिकल उपकरण देख रहा हूँ । उन यंत्रों से निकलती ध्वनियां भी सुन रहा हूं । इसके साथ साथ अपने आगोश में लपेटने के लिए निकट आ रही मृत्यु की पदचाप भी स्पष्ट सुनाई दे रही है ।

अब ध्यान में आ रहा है कि भविष्य के लिए आवश्यक पूंजी जमा होने के पश्चात दौलत संपत्ति से जो अधिक महत्वपूर्ण है वो करना चाहिए। वो शायद रिश्ते नाते संभालना सहेजना या समाजसेवा करना भी हो सकता है।

निरंतर केवल राजनीति के पीछे भागते रहने से व्यक्ति अंदर से सिर्फ और सिर्फ पिसता जाता है । खोखला बनता जाता है । बिल्कुल मेरी तरह।

उम्र भर मैंने जो संपत्ति और राजनैतिक मान सम्मान कमाया वो मैं कदापि साथ नहीं ले जा सकूंगा ।

दुनिया का सबसे महंगा बिछौना कौन सा है, पता है ? “बीमारी का बिछौना” ।

गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर रख सकते हैं । पैसे कमा कर देने वाले मैनेजर रखे जा सकते हैं परंतु अपनी बीमारी को सहने के लिए हम दूसरे किसी अन्य को कभी नियुक्त नहीं कर सकते हैं।

खोई हुई वस्तु मिल सकती है । मगर एक ही चीज ऐसी है जो एक बार हाथ से छूटने के बाद किसी भी उपाय से वापस नहीं मिल सकती है। वो है अपना “आयुष्य” ,”काल”,”समय”।

ऑपरेशन टेबल पर लेटे व्यक्ति को एक बात जरूर ध्यान में आती है कि उससे केवल एक ही पुस्तक पढ़नी शेष रह गई थी और वो पुस्तक है “निरोगी जीवन जीने की पुस्तक” ।

फिलहाल आप जीवन की किसी भी स्थिति या उम्र के किसी भी दौर से गुजर रहे हों तो भी एक न एक दिन काल आपको भी एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देगा कि सामने जीवन के इस नाटक का अंतिम भाग स्पष्ट दिखाई देने लगेगा।

स्वयं की उपेक्षा मत कीजिए । स्वयं ही स्वयं का आदर कीजिए । दूसरों के साथ भी प्रेमपूर्ण बर्ताव कीजिए :ल।

लोग मनुष्यों को इस्तेमाल ( use ) करना सीखते हैं और पैसा संभालना सीखते हैं। वास्तव में पैसा इस्तेमाल करना सीखना चाहिए व मनुष्यों को संभालना सीखना चाहिए ।अपने जीवन की शुरुआत हमारे रोने से होती है और जीवन का समापन दूसरो के रोने से होता है।इन दोनों के बीच में जीवन का जो भाग है वह भरपूर हंस कर बिताएं और उसके लिए सदैव आनंदित रहिए व औरों को भी आनंदित रखिए ”

गंभीर पीड़ित अस्पताल में जीवन के लिए जूझ रहे मनोहर पर्रिकर का यह आत्मचिंतन सोशल मीडिया के जरिये प्राप्त हुआ है । हालांकि इसकी प्रामाणिकता कि यह पर्रिकर जी ने ही लिखा है, सिद्ध होनी बाकी है फिर भी यह प्रत्येक के लिए ग्राह्य है ।

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