कुंभः इंडोनेशिया के लोग बने स्वच्छता अभियान का हिस्सा

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इंडिया व्यू ब्यूरो।

प्रयागराज। परमार्थ निकेतन शिविर प्रयागराज में इन्डोनेशिया से 21 सदस्यों का दल पधारा उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट कर आशीर्वाद लिया।
इन्डोनेशिया के दल ने परमार्थ शिविर में आयोजित विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों यथा प्रार्थना, योग, रूद्राभिषेक, संगम आरती, और सत्संग मंे सहभाग किया। साथ ही उन्होने यहां पर आयोजित स्वच्छता रैली एवं स्वच्छता अभियान में भी सहभाग किया।
सत्संग मंे कुम्भ की महिमा बताते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’कुम्भ महोत्सव का आयोजन समुद्र मंथन का परिणाम है और कुम्भ हमें आत्ममंथन का संदेश देता है। एक समुद्र हमारे अन्दर भी है, समुद्र में वृहद मात्रा में जल होता है और हमारे शरीर में भी लगभग 70 से 80 प्रतिशत जल पाया जाता है। कुम्भ हमें अमृत मंथन की याद दिलाता है, साधक मंथन का संदेश देता है। हम अपने अन्दर मंथन कर उस अमृत विचार को निकाले कि किस प्रकार हम दैवीय मार्ग को अपनाये; सत्संग मार्ग पर अग्रसर हो सके। स्वामी जी महाराज ने कहा कि ध्यान एक ऐसी विधा है जिसके माध्यम से हम आत्ममंथन कर अपने अन्दर के अमृत को निकाल सकते है। कुम्भ कलश केवल बाहर नहीं है बल्कि हमारा शरीर भी एक कुम्भ कलश है ’’ये तन काचा कुम्भ है’’ अब यह आपको तय करना है कि आप इस शरीर रूपी कुम्भ में अमृत भरते है या विष।
स्वामी जी ने कहा कि कुम्भ का मतलब एक डुबकी और एक आचमन नहीं है बल्कि कुम्भ तो आत्ममंथन की डुबकी का नाम है। अब हमंे निश्चय करना है कि हम कुम्भ से विष कलश को लेकर जाये या अमृत कलश; हम अपनी जिन्दगी को अमृत से भर दे या विष से भर दे। अगर हम जिन्दगी को विष से भरते है तो हमारा जीवन दिन प्रतिदिन कड़वा होते जायेगा; बिटर होते जायेगा और हम अगर जीवन को अमृत से भर दे तो दिन प्रतिदिन बेहतर होते जायेगा, बेटर होते जायेगा इसलिये अपने जीवन को अमृत रूपी जल, अमृत रूपी विचारों से भर कर जाये।
इन्डोनेशिया से आये दल ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं साध्वी भगवती सरस्वती जी के दिव्य सत्संग के माध्यम से भारतीय संस्कृति और कुम्भ की महिमा को आत्मसात किया।
इस अवसर पर निवाण रसमवती, मारिसा ग्रीच, यास्मीन ओ गियोगियो, इमााद सुपद, आर्य कुसुमा बनाया, इवेमानमिदीपा मुदिपा, नी पुटु सुपनी, मे केतु सुवर्चिका, सनराइजिह बनाया, युका हिगाशिजीमा, स्लेमेट मुलानी देंडी सेप्टियादी सोर्जाना, दन्तरी सुवहदजनि, गेेदे ओकटारिया सुतम, गेदे अस्तामा, पुष्पाती बनाई, गेदे ईका धर्म, नी गंडा वती, इनेगा रिसना, नोमन बुपार्टा, बर्जर बजानेवाला, जुआन गैलिंडो विल्मा, इमादे दरमायसा, मिहिद मैं वेदन उपस्थित थे। सभी ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के साथ मिलकर वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की और विश्व शान्ति हेतु प्रार्थना की।

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