कभी मुंबई की गलियों में सब्जी बेचने वाले हीरा लाल आज हैं अंतर्राष्ट्रीय साइकलिस्ट

hiralal yadav

इंडिया व्यू ब्यूरो।

मुंबई। कभी मुंबई के दहीसरा की गलियों में आवाज लगाकर सब्जी बेचने वाले आप हैं हीरा लाल यादव। आप मूलतः गोरखनाथ की धरती गोरखपुर, उत्तर प्रदेश से हैं। आप एक दिन अचानक सबकुछ छोड़ साइकिल की यात्रा पर निकल गए और सामाजिक कार्यों में लग गए। 1999 में करगिल युद्ध के समय बिना सीट साइकिल की यात्रा करते हुए करगिल में देश के सैनिकों एवं देश की जनता का पत्र पहुंचाते रहे।

आपकी पहचान अंतर्राष्ट्रीय साइकलिस्ट और समाज सेवी के रूप में हैं। आप थाइलैंड, लाओस, बियतनाम, कंबोडिया, मॉरीशस आदि देश में साइकिल की यात्रा कर चुके हैं।

आज आपकी पहचान अंतर्राष्ट्रीय साइकलिस्ट और समाज सेवी के रूप में हैं। आप थाइलैंड, लाओस, बियतनाम, कंबोडिया, मॉरीशस आदि देश में साइकिल की यात्रा कर चुके हैं। आज भी आप साइकिल से यात्रा कर स्कूल, कॉलेज एवं गांव की यात्रा कर पर्यावरण रक्षा का संदेश दे रहे हैं। देश विदेश में श्री यादव को कई सम्मान एवं पुरस्कार मिल चुके हैं।

हीरालाल यादव कहते हैं कि उन्होंने अपना पूरा जीवन पर्यावरण के लिए समर्पित कर दिया है। अभी हाल ही में जापान में साइकिल यात्रा करके लौटें हैं। देश के विभिन्न जेलों में जाकर कैदियों के अपना जीवन संघर्ष से ब रू करा रहे हैं और उनके जीवन को परिवर्तन कर रहे हैं। इंडिया व्यू डॉट इन भी हीरालाल यादव को शुभकानाएं देता है।

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