“अविरल एवं निर्मल गंगा” के चिंतन को जनमानस में समाहित करना होगाः-अजय

ajay yadav

इंडिया व्यू के लिए जय प्रकाश

पटना। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अनुसांगिक इकाई गंगा समग्र के प्रांत संयोजक अजय यादव ने कहा कि गंगा की निर्मलता सिर्फ सरकार से नहीं बल्कि जन भागीदारी से संभव है। इसे जन आंदोलन का रुप देना होगा। तब जाकर मोक्षदायनी गंगा को कलकल-छलछल और निर्मल बना पाएंगे।

पटना के विजय निकेतन में ‘इंडिया व्यू’ के साथ एक विशेष मुलाकात में गंगा समग्र के संयोजक श्री यादव ने अपनी चिंता और कार्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब हम गंगा की बात करते हैं तो सिर्फ मां गंगा की ही बात नहीं होती है। छोटी, छोटी नदी नाले और गंगा में गिरने वाली सभी नदियों की बात होती है। गंगा हमारी जीवनदायनी हैं। गंगा हमारी संस्कृति की मूल आधार हैं। गंगा हमारी जीवन धारा हैं। इस भाव को जागृत करना होगा।

“गंगा हमारी जीवनदायनी हैं। गंगा हमारी संस्कृति की मूल आधार हैं। गंगा हमारी जीवन धारा हैं। इस भाव को जागृत करना होगा।”

-अजय यादव, संयोजक, गंग्रा समग्र

उन्होंने कहा कि ‘अविरल एवं निर्मल गंगा’  के चिंतन को जन मानस में समाहित करना होगा। ये हम सभी के चिंतन का विषय होना चाहिए। गंगा सिर्फ नदी नहीं, बल्कि जीवनधारा है। इसके लिए कई प्रकल्पों पर काम करना होगा। जैसे तटीय गंगा ग्राम, स्नान घाट, शमशान घाटों पर गंगा से जुड़े सभी वर्गों को जोड़ना और जागृत करना होगा।

श्री यादव ने कहा कि सभी माताओं, बहनों को भी इसमें आगे आना होगा। उन्हें अपनी आने वाली पीढ़ी को बताना होगा कि मेरे अलावा गंगा भी मां हैं। जब इस शास्वत सत्य से व्यक्ति मानसिक रुप से जोड़ेगा तो मां गंगा स्वतः निर्मल और अविरल हो जाएंगी।

इस मौके पर सह संयोजक जय किशोर पाठक, अजीत पोद्दार, अवनिश कुमार मौजूद थे।

 

One Response to “अविरल एवं निर्मल गंगा” के चिंतन को जनमानस में समाहित करना होगाः-अजय

  1. Suresh sir says:

    काफी सुंदर लगा और अजय यादव जी का गंगा के प्रति लोगों की भागीदारी जरूरी है ,
    यह कथन समाज को हर हाल में समझना होगा|

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