मॉरीशस में बच्चों के जिंदगी की ‘मसीहा’ बनी ‘ज्योति’

jyotee jatoo derochuni

फ्रांस की एक संस्था एमएफआर से जुड़ी मॉरीशस की सुश्री ज्योति जातू डेरोचुनी इन दिनों भारत यात्रा पर हैं। भारत में बच्चों के साथ संवाद कर रही हैं। लेकिन, मॉरीशस में रहकर बेसहारा बच्चों कों केंद्र में रखकर परिवार संस्था की मजबूती के लिए काम कर रही हैं। मॉरीशस ही नहीं बल्कि हिंद महासागर के अन्य देशों में भी ज्योति एक प्रेरणा के रूप में उभर रही हैं। हिंदी, भोजपुरी, अंग्रेजी फेंच और क्रियोल में बात करने वाली ज्योति जातू डेरोचुनी की इंडिया व्यू के लिए जय प्रकाश एवं जनार्दन यादव की रिपोर्ट।

कहते हैं न कि जब किसी की जिंदगी में घनघोर अंधेरा होता है तो एक चिराग की ‘ज्योति’ से भी अंधियार मिटाई जा सकती है। वह चिराग खुद को जलाता है। खुद अंधेरे में रहता है। मगर उसकी ज्योति से एक झटके में उम्मीद की लौ जलने लगती है। मानों नया सवेरा होने वाला हो। कुछ इसी तरह हिंद के बिंद यानी मॉरीशस में चिराग की एक ‘ज्योति’ पिछले कई वषों से जल रही है।

मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुइस से कोई 13 किलोमीटर की दूरी पर लॉंग माउंटेशन नामक स्थान की रहने वाली ‘ज्योति’ मॉरीशस में उम्मीद की किरण बनी हैं। अपना पूरा जीवन बच्चों के लिए ‘होम’ करने वाली 30 साल की ‘ज्योति’ का पूरा नाम ज्योति जातू डेरोचुनी है। सुश्री ज्योति मॉरीशस के फ्लॉक नामक इलाके में वैसे बच्चों को सवांर रही हैं जिनके सपने मर चुकें। उम्मीदे खत्म हो चुकी हैं।

भारत दौरे पर आईं ज्योति ने एक बातचीत में बताया कि बचपन में ही पिता का साया छिन गया,  मगर पिता की जगह मेरे बड़े भाइयों ने ली और पढ़ाई पूरी करने में कोई कमी नहीं होने दी। मैंने मैडागास्कर से प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।

पढाई पूरी करने के बाद 2007 में ज्योंति की नौकरी मॉरीशस स्थित एक मल्टीनेशनल कम्पनी में लग गई। सुश्री ज्योति कहती हैं कि एक दिन मैं अपने बड़े भाई राज जातू के स्कूल गई। जो पहले से ही बेसहारा एवं वंचित बच्चों के लिए काम करते हैं। जब मैं वहां बच्चों के बीच रही, उनसे बातें की और अपने आप को रोक नहीं पाई। जब घर लौटीं तो मैंने अपनी अच्छी-खासी नौकरी को छोड़ने का फैसला कर लिया और छोड़ भी दी। तब से गरीब एवं बेसहारा बच्चों के साथ रहकर काम कर रही हूं।

‘सोशल वर्क का रास्ता आसान नहीं होता। पग-पग पर संघर्ष से सामाना करना पड़ता है। परेशानियां पीछा नहीं छोड़ती हैं। लेकिन, जोश, जुनून और जज्बा हो तो सबकुछ संभव हो जाता है।’

-ज्योति जातू डेरोचुनी, सामाजिक कार्यकर्ता, मॉरीशस

फ्रांस की संस्था एमएफआर(MFR) से जुड़कर बच्चों को शिक्षा, संस्कार के स्किल की ट्रेनिंग देकर सक्षम बना रही हैं। ज्योति ने करीब 2011 में एमएफआर, फ्लॉक सेंटर की स्थापना कीं। वे कहती हैं, ‘सोशल वर्क का रास्ता आसान नहीं होता। पग-पग पर संघर्ष से सामाना करना पड़ता है। परेशानियां पीछा नहीं छोड़ती हैं। लेकिन, जोश, जुनून और जज्बा हो तो सबकुछ संभव हो जाता है। ठीक इसी तरह जब मुझे फ्लॉक में सेंटर खोलना था। तबसे हमें भी खूब संघर्ष करना पड़ा। घर-घर जाकर बच्चों को बुलाकर लाती थी। माता-पिता को समझाया करती थी। किसी तरह से 200 युवाओं एवं बच्चों को जोड़ने में सफल रही और एमएफआर सेंटर की शुरुआत कर दी। उन्हें रोजगारपरक शिक्षा और संस्कार से जोड़ी।

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एमएफआर में पढ़ाई करने के बाद नौकरी पाने वाले स्टूडेंट।

जब बच्चों में इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट होने लगा। बच्चें अपने परिवार से जुड़ने लगे और नौकरियां मिलने लगीं तो सोसाइटी का मेरे और मेरी टीम प्रति भरोसा हुआ। लोगों ने अपने बच्चों को भेजना शुरू कर दिया है। करीब 8 साल हुए सेंटर के चलते हुए सैकड़ों की संख्या में युवाओं ने अपनी जिंदगी की शुरुआत नए सिरे से की है। वे आगे बताती हैं कि जब सेंटर में बच्चे आते हैं तो कुछ ही महीनों में उनके जीवन में अंतर आने लगता है। कुछ दिन तक बच्चों की पढ़ाई सेंटर पर होती है फिर इंडस्ट्री में ट्रेनिंग कराई जाती है।

सुश्री ज्योति बताती हैं। एमएफआर एक फेंच नाम है, जिसका अर्थ होता है गांव का घर और परिवार। एमएफआर दुनिया के कई देशों में काम कर रहा है। मॉरीशस में एमएफआर को फिलिप आच्वैन (Philip Ah Chuen) नेतृत्व प्रदान करते हैं। वे कहती हैं इन सभी कामों में आर्थिक कठिनाइयां होती हैं। लेकिन, सोसाइटी में अच्छे लोग भी हैं जो हमेशा यह कहकर सपोर्ट करते हैं कि तुम अच्छा काम कर रही हो। मैं साथ हूं। और ऐसे में हर कोशिश में मैं कामयाब होती हूं। ज्योति कहती हैं कि ऐसा करते करते जब युवाओं में उम्मीद, उनके माता-पिता के चेहरे पर खुशी और सोसाइटी में बदलाव देखते हुए जब घर लौटती हूं तो मेरे अंदर सुकून की एक ‘ज्योति’ जलती हैं। जिसे मैं जलाए रखना चाहती हैं और इसी में जीवन को झोंक देना चाहती हूं।

आप भी इनसे जुड़ सकते हैं। https://www.facebook.com/MFREmaurice/ या ई-मेल पर संपर्क कर सकते हैं parijyoti029@yahoo.com

One Response to मॉरीशस में बच्चों के जिंदगी की ‘मसीहा’ बनी ‘ज्योति’

  1. अनिल says:

    बहुत ही सुन्दर शव्द कोश का प्रयोग किया गया है बहुत सुन्दर.

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