मिलिए एक ऐसे निर्माता-निर्देशक से जिन्होंने महज 24 साल की उम्र बना डाली 159 फिल्में 

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कामदा कुमार।

नई दिल्ली। कोई अपने काम से कैसे प्यार करता है। यह महज 24 साल के उज्ज्वल पांडेय से सीखा जा सकता है। अपनी इस छोटी उम्र में ही उज्ज्वल पांडेय 159 शॉर्ट फिल्में बना चुके हैं। इनके कई फिल्मों की चर्चा अंतर्राष्ट्रीय पर हो चुकी है। श्री पांडेय एक जुनूनी फ़िल्म निर्माता-निर्देशक हैं।

श्री पांडेय मूलतः गाजीपुर से हैं। लेकिन, आपने बनारस को कर्मभूमि के रूप में चुना है। आप गांधीवादी पृष्ठभूमि से तालूक रखते हैं। आप अपनी फिल्मों के माध्यम से समाज में सामाजिक बदलाव की गाथा लिख रहे हैं। फ़ीचर फ़िल्म कोहबर निर्माणाधीन है। जबकि आपकी ‘कलक्टर’  फिल्म जल्द ही आने वाली है।

क्षेत्रीय सिनेमा की अपनी इंडस्ट्री के लिए पिछले छः सालों से आंदोलनरत हैं। फिल्म निर्माण से इत्तर आपकी पहचान एक कवि एवं लेखक के रूप में भी हैं। आप 18 साल की उम्र से बनारस में फ़िल्म इंडस्ट्री बनाने की मुहीम चला रहे। आप कहते हैं कि बदलाव युवा ही लेकर आ सकते हैं। इस कथन को चरितार्थ करने के लिए आप प्रयासरत हैं। आप रंगमंच से जुड़कर यु पी और बिहार के लिए ख़ुद की हो फ़िल्म इंडस्ट्री इस विषय पर कार्य कर रहे हैं।

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बदलाव के सारथी सम्मान से सम्मानित होते श्री उज्ज्वल पांडेय़।

दरअसल, 31 मार्च, 2019 को नई दिल्ली के कॉस्टीट्यूशन क्लब में सार्थक बातचीत के लिए एक आयोजन किया गया। विषय था ‘बदलाव के सारथी’। आयोजन का मकसद था कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए कुछ अलग कर रहे लोगों के साथ बातचीत हो सके। एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ने के लिए एक दूसरे का हाथ थामा जा सके। एक दूसरे को प्रेरणा मिल सके।

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