एक ऐसे प्रोफेसर जो आदिवासी इलाकों में जगा रहे हैं रंगकर्म का अलख

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भुवनेश्वर से इंडिया व्यू के लिए रवि की रिपोर्ट।

काम करने का जुनून सवार हो तो इंसान क्या कुछ नहीं करता है। ऐसे ही एक ऐसे प्रोफेसर हैं जो ओडिशा के सुदूर आदिवासी इलाकों में नाट्य-कला का अलख जगा रहे हैं। न सिर्फ मंच के मोहताज रंगकर्मियों को उनके ही इलाकों में मंच उपलब्ध करा है बल्कि उन्हें रंगमंच का गुर भी सिखा रहे हैं।

यह जुनून सहायक प्रोफेसर सौरव गुप्ता का है। आकाशवाणी, दूरदर्शन, बिग एफएम, केंद्रीय विवि बिहार और अन्य मीडिया संस्थानों में योगदान देने के बाद, अब केंद्रीय विवि ओड़िशा के सहायक प्रोफेसर के पद तैनात हैं।

सौरव गुप्ता आज से लगभग 15 साल पहले नाटक से जुड़े और इस कदर लगाव बढ़ा की जहां भी जाते हैं वहां की प्रतिभा को निखारने के लिए एक मंच तैयार कर देते हैं। इसी कड़ी में वे अब ओड़िशा के कोरापुट जिला में नाट्य कला का सृजन कर रहे हैं। वो भी इस परिस्थिति में जहां हर कदम पर दिक्कतों का समाना करना पड़ाता है।

इसी कड़ी में अब संगीत कला अकादमी और नांदनिक थियेटर कोरापुट के गठजोड़ से लोक-जात्रा (लोक-नाट्य महोत्सव) का आयोजन किया गया है। जिसमें भारत के छः राज्यों के कलाकार भाग ले रहे हैं।

सौरव गुप्ता बताते हैं, कोरापुट में प्रतिभा की कमी नहीं है। आदिवासी इलाकों में जो प्रतिभा है, उसे वैश्विक स्तर पर पहुंचाया जा सकता है। हम इनके रंगकर्म को नहीं पहचान पाते हैं।

कोरापुट जिला ओड़िशा के पिछड़े जिलों में से एक है पर यहां की प्राकृतिक सुंदरता स्वीटजरलैंड, कश्मीर से कम नहीं है। लेकिन आदिवासी क्षेत्र होने के कारण आर्थिक रूप से पिछड़ा है। सच तो यह भी है कि लोग कोरापुट का नाम सुनकर कतराते हैं।

भुवनेश्वर के लोग सौरव गुप्ता से कहते हैं कि राजधानी में नाटक करवाएं, कोरापुट कौन जाएगा। तो सौरव गुप्ता कहना है कि कला का प्रेमी तो नरक में भी चला जाए, कोरापुट तो ओड़िशा का स्वर्ग है।

कोरापुट को कला के क्षेत्र में आगे बढाने में योगदान दे रहे सौरव गुप्ता 2014 में नांदनिक थियेटर का गठन किए जहां पर युवा कलाकारों को निःशुल्क नाटक के बारे में बतात-सिखाते हैं। समय-समय पर खुद के खर्च पर अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों-नाटकारों को बुलाकर प्रशिक्षणशाला का आयोजन भी करते हैं। पहले तो काफी दिक्कत हुआ पर अभी संगीत नाटक अकादमी और अन्य संस्थानों के आर्थिक मदद से काम कर रहे हैं।

नाटक को आगे बढ़ाने के लिए सौरव गुप्ता विश्वविद्यालय से आने के बाद देर रात तक काम करते हैं। इस काम को बढ़ाने के लिए धर्मपत्नी मोनीदीपा गुप्ता का सहयोग भी उम्दा है। जो कि घर काम तो करती ही हैं, साथ में नांदनिक थियेटर को भरपूर समय देती हैं।

थियेटर के क्षेत्र में ऑनलाइन शोध-पत्रिका संपादन और अभी तक थियेटर पर चार किताब लिख चुके हैं। पिछले साल भी कोरापुट में राष्ट्रीय स्तर पर नाट्य महोत्सव का आयोजन किया जा चुका है। इनके कला, निर्देशन और लेखनी के काफी लोग कायल हैं। तीन दिवसीय लोक-जात्रा (लोक नाट्य महोत्सव-2017) में बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, असम, झारखंड और ओड़िशा के कलाकार शामिल हो रहे हैं।

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