दिल्ली की चकाचौंध छोड़ गांव पहुंचे संतोष, बच्चों की जिंदगी संवारने का संकल्प

santosh rathod

इंडिया व्यू के लिए ब्यूरो रिपोर्ट।

दुनिया की चकाचौध छोड़ना कोई आसान काम नहीं होता है। लेकिन, जिसने भी यह ठान लिया कि मां, मातृभूमि और माताभाषा के लिए जीना और मरना है तो उसके लिए यह एक झटके का काम होता है। दिल्ली में दो दशक से रहने वाले युवा उद्यमी संतोष सिंह राठौर ने आधुनिकता की अंधी दौड़ को छोड़ गांव के नौनिहालों के लिए काम करना शुरु कर दिया है।

संतोष सिंह ने पहले समर्पण फाउंडेशन की नीव डाली। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र में काम करने के लिए मन बनाया। इन सभी कार्यों के लिए उन्होंने बिहार के गांवों को चुना और वैशाली के कुड़वा पंचायत स्थित जहांगीरपुर गांव में 26 नौनिहालों के शिक्षा की जिम्मेवारी अपने कंधे पर उठा ली।

“दिल्ली में रहते हुए हमेशा मन गांव में रहता था। कोई ऐसा दिन नहीं है जिस दिन दिल्ली छोड़कर गांव भाग जाने का मन नहीं करता था। गांव में जाकर अपनों के बीच उनके लिए काम करने का इरादा बना और चला आया गांव।”

-संतोष सिंह राठौर, अध्यक्ष, समर्पण फाउंडेशन

संतोष सिंह राठौर बताते हैं कि दिल्ली में रहते हुए हमेशा मन गांव में रहता था। कोई ऐसा दिन नहीं है जिस दिन दिल्ली छोड़कर गांव भाग जाने का मन नहीं करता था। गांव में जाकर अपनों के बीच उनके लिए काम करने का इरादा बना और चला आया गांव। आज फाउंडेशन ने अपने लक्ष्य का पहला कदम बढ़ाया है।

samarpan foundation

बच्चों की जिंदगी संवारने की संकल्प लिया समर्पण फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने

संस्था ने गांव के अत्यंत गरीब एवं सभी वर्ग के बच्चों को शिक्षा और स्वास्थ्य का बीड़ा उठाया है। इन बच्चों में ऐसे भी बच्चे हैं तो स्कूल ही नहीं जाते हैं। अब ये बच्चे नियमित पढ़ाई करेंगे। इन सभी बच्चों को शिक्षा की सामग्री दी गई है। शिक्षक और बच्चों की देखरेख करने के लिए कई स्वयं सेवक जुड़े हैं। बच्चों में संस्कार, नैतिक शिक्षा, आधुनिक शिक्षा प्रणाली, कंप्यूटर और कौशल विकास से जोड़ा जाएगा। साथ ही इनके स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर की जाएगी।

श्री राठौर ने बताया कि हर गांव में बच्चों की जिम्मेवारी उठाई जाएगी। इसके लिए कई स्तर पर काम किया जा रहा है। कई पंचायतों को चयनित किया गया है। जहां पुस्तकालय खोला जाएगा।

फाउंडेशन की इस महती योजना में संतोष राठौर के साथ रविरंजन कुमार, वीरभद्र, रीना सिंह, कुणाल कुमार, हितेश कुमार, श्रीकांत सिंह, देवकांत सिंह, जितेंद्र कुमार एवं सचिव भगवती शरण आदि है।

One Response to दिल्ली की चकाचौंध छोड़ गांव पहुंचे संतोष, बच्चों की जिंदगी संवारने का संकल्प

  1. sunil, darbhanga says:

    bhai ji bahut sundar kaam hai. badhai, hamko bhi jod sakte hain. kaise juda ja sakta hai

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