मेट्रो भाड़े के मुद्दे पर आप और बीजेपी का पाखंड हुआ उजागर-स्वराज इंडिया

delhi metro
इंडिया व्यू ब्यूरो।
नई दिल्ली, नव गठित राजनीतिक पार्टी स्वराज इंडिया के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अनुपम ने किराया बढ़ाने को लेकर बीजेपी और आप की कड़ी आलोचना की है। किराया बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने के बाद अब दोनों पार्टियां विरोध प्रदर्शन का ढोंग कर रही है। मेट्रो किराया बढ़ाने की सिफारिश एक समिति द्वारा की गई थी जिसमें भाजपा शाषित केंद्र और दिल्ली सरकार के नुमाइंदे थे। वास्तव में ये दोनों पार्टियां छः महीने के भीतर दूसरी बार मेट्रो किराये में वृद्धि के लिए जिम्मेदार है। अब अपना निर्णय उल्टा पड़ते देख आप और भाजपा किराया वृद्धि के खिलाफ होने का दिखावा कर रहे हैं।
यह हास्यास्पद और बेतुका है कि जब आम आदमी पार्टी और भाजपा दोनों ही इस वृद्धि के खिलाफ हैं, तो आख़िर मेट्रो भाड़ा बढ़ाने का यह निर्णय लिया कैसे गया।
अनुपम ने कहा कि बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों ही मेट्रो के किराए में वृद्धि के फैसले में शामिल थीं, लेकिन अब वे विरोध का ढोंग कर दिल्ली की जनता की आँखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं। इस मामले में इन दोनों पार्टियों का पाखंड पूरी तरह उजागर हो चुका है। आश्चर्य की बात है कि इन पार्टियों को अब भी लगता है कि वे इस तरह की चालबाज़ियों का सहारा लेकर दिल्ली के लोगों को धोखा दे सकते हैं। दिल्ली के आम लोगों के हक़ में मेट्रो भाड़ों की अनुचित बढ़ोतरी का विरोध करने के लिए स्वराज इंडिया कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
अनुपम ने मेट्रो रेल किराए के इज़ाफ़े के मुद्दे पर आम पार्टी की दिल्ली सरकार के यू-टर्न का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अपने ही भागीदारी से लियेबगये निर्णय पर दिल्ली सरकार द्वारा इन्क्वायरी की बात हैरान करने वाली है।
स्वराज इंडिया ने अपना रुख़ स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह सैद्धांतिक रूप से किराये में हर वृद्धि के खिलाफ नहीं है बल्कि इसमें अनुचित वृद्धि के खिलाफ है। पार्टी ने कहा कि 2009 के बाद से इस साल 10 मई को पहली बार मेट्रो के किराए में बढ़ोतरी हुई थी। उस वक़्त फैसले का विरोध नहीं किया क्योंकि यह कदम मेट्रो रेल को लाभदायक बनाए रखने के लिए आवश्यक था।
अनुपम ने कहा, “लेकिन छह महीने के कम समय में कीमत दो बार बढ़ाना किसी भी तरह से उचित नहीं है।” तथा उम्मीद जताया है कि इस फैसले को वापस लेते हुए सरकार दिल्ली के नागरिकों पर अतिरिक्त किराए का बोझ नहीं पड़ने देगी।

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