ध्रुपद की परंपरा बढ़ाते “बिहार बंधु”

the bihar brothers sanjeev jha

इंडिया व्यू के लिए राजेश कुमार की प्रस्तुति।

ये हैं बिहार बंधु। इनकी पहचान द बिहार ब्रदर्स के रुप में हैं। बिहार बंधु के साथी प्राचीन गायन शैली “ध्रुपद” को बचाने और बढ़ाने में जुटे हुए हैं। संजीव झा एवं मनीष हाल ही में राजा-रानी महल चंदेरी में ध्रुपद उत्सव में शामिल हुए।

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द बिहार ब्रदर्स यानी बिहार बंधु प्राचीन गायन शैली ध्रुपद को आगे बढ़ाने में जी जान से जुटे हुए हैं। संजीव झा एवं मनीष  गायन को लेकर देश-दुनिया में नाम कमा रहे हैं। फोटो साभार फेसबुक

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ध्रुपद का मतलब यह है कि जो नियम में बंधा हो। यह माना जाता है कि आज तक यह सर्व सम्मति नहीं बन पाई है कि ध्रुपद का अविष्कार कब और किसने किया। लेकिन, कुछ विद्वानों का मानना है कि ग्वालियर के राजा मान सिंह तोमर ने की। फोटो साभार फेसबुक

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प्राचीन गायन शैली ध्रुपद की प्रस्तुति देते राजा-रानी महल चंदेर में द बिहार ब्रदर्स। बिहार ब्रदर्स के बैनर तले संजीव झा एवं मनीष साधना में।  साभार -फेसबुक

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ध्रुपद एक गंभीर प्रकृति का गीत है। इसे गाने में कंठ और फेफड़े पर बल पड़ता है। फोटो साभार फेसबुक

2 Responses to ध्रुपद की परंपरा बढ़ाते “बिहार बंधु”

  1. महेश कुमार says:

    जीय हो बिहार के लल्ला.

  2. नागेंद्र प्रसाद सिंह, भागलपुर says:

    प्राचीन शैली में साधाना करना बहुत बड़ी बात है बिहार बंधु के लोग। आप लोग इसी तरह के आगे बढ़ें मेरी कामना है। आशीष

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