भारत की दो महान विभूति, जिन्होंने रचा इतिहास

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जहां दुनिया में क्रिसमस की धूम है। वहीं भारत के लिए आज का दिन अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। एक महामना मदनमोहन मालवीय और दूसरे अटल बिहारी वाजपेयी का आज यानी 25 दिसंबर जन्मदिन है। दोनों महान व्यक्तित्व का देश के निर्माण में अहम योगदान है। भारत रत्न से सम्मानित दोनों हस्तियों में मालवीय जी हमारे बीच नहीं हैं पर अटल जी हमारे बीच हैं। लेकिन, अस्वस्थ हैं। आइए दोनों महानों विभूतियों की कृतियों को याद करते हुए अटल जी स्वस्थ जीवन की कामना करें। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर, ब्लॉगर एवं युवा पत्रकार विभू चिंमय* की एक रपट

“टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी

अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी

हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा”

जी हां, ये चार पंक्तियां अलग अलग युग में, अलग अलग सन्दर्भ में अलग अलग मतलब लिए होते हैं। आज जब सारा संसार क्रिसमस मनाने में व्यस्त है। लेकिन,  आज के दिन हमारे दो सेंटा क्लाउस का जन्मदिन है, सेंटा क्लाउस शायद ईसाई मान्यता के अनुसार वह व्यक्ति जो एक दिन हर उस गरीब की मुरीद पूरी करता है जो असमर्थ है ।

“भारत की एकता का मुख्य आधार है एक संस्कृति,  जिसका उत्साह कभी नहीं टूटा। यही इसकी विशेषता है। भारतीय संस्कृति अक्षुण्ण है, क्योंकि भारतीय संस्कृति की धारा निरंतर बहती रही है और बहेगी।”

-मदनमोहन मालवीय

भारत की वो पहली और आखिरी शख्सियत जिसे महामना की उपाधि से सम्मानित किया गया, हम बात उसी सख्शियत की कर रहे हैं जिसे सदी का सबसे बड़ा भिखारी भी कहा गया, यह हैं हमारे पहले सेंटा क्लाउस जिन्होंने अपने समय का विmadan-mohanश्व का तीसरा और भारत का पहला सबसे बड़ा विश्वविद्यालय का निर्माण करवाया। उन्होंने भारतीयों को तोहफे में ऐसी जागीर दी, जो शायद बहुमूल्य है,  आज समग्र संसार बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय का लोहा मानता है,  बनारसी रंग में रंगा,  देश के कई महान विद्वानों, राजनीतिज्ञों, अर्थशास्त्रियों और
विचारकों की कर्मस्थली बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय का महत्व नालंदा विश्वविद्यालय से कहीँ कमतर नहीं, तो दूसरी और भारत की राजनीति के सबसे अच्छे वक्ता जिनको सुनने के लिए विरोधी भी प्रतीक्षा करते थे, जिन्होंने भारत माता की सेवा के लिए अपना संपूर्ण जीवन भारत माता के चरणों में अर्पित कर दिया, एक सच्चे स्वयंसेवी “श्री अटल विहारी वाजपेयी” ।

“होकर स्वतन्त्र मैने कब चाहा है कर लूं सब को गुलाम

मैने तो सदा सिखाया है करना अपने मन को गुलाम

गोपाल राम के नामों पर कब मैने अत्याचार किया

कब दुनिया को हिन्दू करने घर घर मे नरसंहार किया

कोई बतलाए काबुल मे जाकर कितनी मस्जिद तोडी

भूभाग नही शत शत मानव के हृदय जीतने का निश्चय

हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय॥”

हिंदुत्व से लेकर सेक्युलर तक की जो व्याख्या श्री अटल जी ने की वह शायद अपने आप में अतुल्य है। महात्मा गाँधी के साथ आजादी की लड़ाई से लेकर इंदिरा गाँधी के इमरजेंसी में देश की वैचारिक स्वतंत्रता के लिए इस शख्सियत को कई बार जेल की काल-कोठरी का कष्ट सहना पड़ा । आज भी इनके द्वारा देश हित में लिए गए कई कदम विरोधियों की भी वाह वाही बटोरते हैं ।

आज देश को इन दोनों का नमन करते हुए, उन्हें वो सम्मान देना चाहिए जिसके अनुरूप इन्होंने कार्य किया है,  आज श्री अटल बिहारी वाजपेयी हम सबके बीच मौजूद हैं, ये हमारे लिए बेहद फक्र की बात है, आज अटल जी को उनके जन्म दिवस पर ढेरों बधाई, हम उनके स्वास्थ लाभ की कामना करते हैं ।

(*ये लेखक के निजी विचार है)

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